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Jay Devi Jay Devi Jay Mahalakshmi Lyrics

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श्री महालक्ष्मीची आरती

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।

पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता।

कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।

सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं।

झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी।

माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।

शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी।

सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी।

गायत्री निजबीजा निगमागम सारी।

प्रगटे पद्मावती निजधर्माचारी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

अमृतभरिते सरिते अघदुरितें वारीं।

मारी दुर्घट असुरां भवदुस्तर तारीं।

वारी मायापटल प्रणमत परिवारी।

हें रुप चिद्रूप दावी निर्धारी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

चतुराननें कुश्चित कर्मांच्या ओळी।

लिहिल्या असतिल माते माझे निजभाळी।

पुसोनि चरणातळी पदसुमने क्षाळी।

मुक्तेश्वर नागर क्षीरसागरबाळी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

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Maa Vaibhav Laxmi Ki Aarti Lyrics

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ॐ वैभव लक्ष्मी माता,

मैया वैभव लक्ष्मी माता,

भक्तों के हितकारिनी,

भक्तों के हितकारिनी,

सुख वैभव दाता,

ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

लक्ष्मी माँ का नाम जो लेता,

सुख सम्पति पाता,

मैया सुख सम्पति पाता,

दुःख दरिद्र मिटता,

दुःख दरिद्र मिटता,

बांछित फल पाता ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,

मैया वैभव लक्ष्मी माता,

भक्तों के हितकारिनी,

भक्तों के हितकारिनी,

सुख वैभव दाता,

ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

लक्ष्मी माता तू जग माता,

जग पालक रानी,

मैया जग पालक रानी,

हाथ जोड़ गुण गाते,

हाथ जोड़ गुण गाते,

जग के सब प्राणी ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,

मैया वैभव लक्ष्मी माता,

भक्तों के हितकारिनी,

भक्तों के हितकारिनी,

सुख वैभव दाता,

ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

हे माँ तेरी शरण में जो आता,

तेरी भक्ति पाता,

मैया तेरी भक्ति पाता,

माँ तेरी ममता पा के,

माँ तेरी ममता पा के,

अंत स्वर्ग जाता ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,

मैया वैभव लक्ष्मी माता,

भक्तों के हितकारिनी,

भक्तों के हितकारिनी,

सुख वैभव दाता,

ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,

मैया वैभव लक्ष्मी माता,

भक्तों के हितकारिनी,

भक्तों के हितकारिनी,

सुख वैभव दाता,

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,

ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

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जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।

पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता।

कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।

सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं।

झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी।

माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।

शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी।

सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी।

गायत्री निजबीजा निगमागम सारी।

प्रगटे पद्मावती निजधर्माचारी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

अमृतभरिते सरिते अघदुरितें वारीं।

मारी दुर्घट असुरां भवदुस्तर तारीं।

वारी मायापटल प्रणमत परिवारी।

हें रुप चिद्रूप दावी निर्धारी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

चतुराननें कुश्चित कर्मांच्या ओळी।

लिहिल्या असतिल माते माझे निजभाळी।

पुसोनि चरणातळी पदसुमने क्षाळी।

मुक्तेश्वर नागर क्षीरसागरबाळी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी…॥

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Laxmi Mata Aarti Lyrics

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ॐ जय लक्ष्मी माता,

मैया जय लक्ष्मी माता ।

तुमको निसदिन सेवत,

हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,

तुम ही जग माता ।

सूर्य चद्रंमा ध्यावत,

नारद ऋषि गाता ॥

॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

दुर्गा रूप निरंजनि,

सुख-संपत्ति दाता ।

जो कोई तुमको ध्याता,

ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥

॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,

तुम ही शुभदाता ।

कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,

भव निधि की त्राता ॥

॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,

ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।

सब सभंव हो जाता,

मन नहीं घबराता ॥

।।ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,

वस्त्र न कोई पाता ।

खान पान का वैभव,

सब तुमसे आता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,

क्षीरोदधि जाता ।

रत्न चतुर्दश तुम बिन,

कोई नहीं पाता ॥

।।ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

महालक्ष्मी जी की आरती,

जो कोई नर गाता ।

उँर आंनद समाता,

पाप उतर जाता ॥

॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

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Shree Maa Laxmi Chalisa Lyrics

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॥ दोहा ॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा,

करो हृदय में वास।

मनोकामना सिद्ध करि,

परुवहु मेरी आस॥

॥ सोरठा ॥

यही मोर अरदास,

हाथ जोड़ विनती करुं।

सब विधि करौ सुवास,

जय जननि जगदम्बिका।

॥ चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।

ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥

तुम समान नहिं कोई उपकारी।

सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

जय जय जगत जननि जगदम्बा।

सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥

तुम ही हो सब घट घट वासी।

विनती यही हमारी खासी॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी।

दीनन की तुम हो हितकारी॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।

कृपा करौ जग जननि भवानी॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।

सुधि लीजै अपराध बिसारी॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी।

जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता।

संकट हरो हमारी माता॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो।

चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी।

सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा।

रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।

लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं।

सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

अपनाया तोहि अन्तर्यामी।

विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी।

कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई।

मन इच्छित वाञ्छित फल पाई॥

तजि छल कपट और चतुराई।

पूजहिं विविध भांति मनलाई॥

और हाल मैं कहौं बुझाई।

जो यह पाठ करै मन लाई॥

ताको कोई कष्ट नोई।

मन इच्छित पावै फल सोई॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि।

त्रिविध ताप भव बन्धन हारिणी॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै।

ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

ताकौ कोई न रोग सतावै।

पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥

पुत्रहीन अरु सम्पति हीना।

अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै।

शंका दिल में कभी न लावै॥

पाठ करावै दिन चालीसा।

ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।

कमी नहीं काहू की आवै॥

बारह मास करै जो पूजा।

तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही।

उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई।

लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा।

होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी।

सब में व्यापित हो गुण खानी॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं।

तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै।

संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी।

दर्शन दजै दशा निहारी॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।

तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में।

सब जानत हो अपने मन में॥

रुप चतुर्भुज करके धारण।

कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई।

ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥

॥ दोहा ॥

त्राहि त्राहि दुःख हारिणी,

हरो वेगि सब त्रास।

जयति जयति जय लक्ष्मी,

करो शत्रु को नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित,

विनय करत कर जोर।

मातु लक्ष्मी दास पर,

करहु दया की कोर॥

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